Monday, July 31, 2017

i m back!!!












yupe!!!! after a long time I m back on my blog.In past few months rather I should say years.....that I was not on scene .I have grown up now ,going to school regularly n I have joined Sapling (dance)class this year.
Everybody seems to be busy now a days but still the love among family members is same.We went to kashid trip in the first weekend of January, trip was awesome.
This year is a  memorable year  as I have visited Sammed shikharji with my family in the month of march.I m too small to know the value of going to the pilgrimage places but everyone in the family made me climbed the mountains saying "God is going to bless u dear".Dad hired doliwala for me as he might be assured that I cant walk that much.Everybody waked me around 1 at night n mumma took me for a bath. We started climbing around 2 saying bhomiya maharaj ki jai. Dad was with my palki n he boost the enthusiasm saying Namokaar Mantra.

There were 8 more people on this trip with me,starting with dadu dadi mummy papa champu mama mami rishit mama n dimant mama.that day was very tough for me.The path was too tough to climb but with dad's support I made it.

The poem written by my mom will surely summerise the importance of this trip.The poem goes like this.


शिखर से शिखर तक 




शिखर से शिखर का सफर एक अनूठा अहसास दिलाता है ,
जब स्मरण करे वो पल तो मीठी मुस्कान वो लता है 
सम्मेद शिखर से शुरू पड़ाव ,न सोचा था इतना अदभूत  होगा,
ऊचे पर्वतो का वो सुनहरा नज़ारा क्या इतना अदुितिया होगा 


खड़ी चढाई उचा पर्वत कुछ कठिन सा लगता था,
अँधेरे में बस चलते चलो कुछ अजीब सा लगता था 
फिर क्या था …। 
पकड़ी लाठी और चल पड़े ले भोमिया जी का नाम,
उनके हवाले कर दिया अब अगले दिन का काम 
चल पड़े अपनों के साथ ,था एक दूसरे का विश्वास 
आगे पीछे होते गए पर नहीं हारने दी मन की आस 

चन्द्रमुख रौशनी के संग पार करा जब चोपराकुंड 
तो पाया प्रभु का  जलाभिषेक हुए उनके दिव्य दर्शन 
अब मन में उत्साह जगा आगे जल्दी बढ़ना है,
ऊपर का अदुितीय नज़ारा आखो में कैद करना है 

गौतम स्वामी की टोंक पर मंद हवा ने जब तान छेड़ी ,
तो मानो ऐसा लगा प्रभु के चरण कमलो ने वायु की चादर ओढ़ी 
लिया कपूर और अर्घ पड़ा करा चरणो को प्रर्ाम 
मात्र एक परिक्रमा करने से पाया अनेक मुनियो का मोक्ष स्थान

करवा आगे चलता गया,टोको को करते  प्रणाम 
दीपक कपूर अर्घ सहित जाना प्रभु का मोक्ष स्थान 
प्रकति की अपार लीला ऐसी जगह देखी जाती 
जहा अनेकानेक साधुओ की घोर  तपस्या आकि जाती 
ऊचे पर्वत बैठ शिखर पर,पाया जिन्होंने मोक्षधाम 
उन सबके चरणो की वंदना करते गए सब हाथ थाम 

एक पड़ाव पार हुआ जब चन्द्रप्रभु की टोंक छुई 
एक शिखर से दूसरे शिखर की कुछ दुरी जो तय हुई 
कुछ समय विश्राम किया फिर चल पड़े जलमंदिर की ओर  
रास्ते के टोको का वंदन करते चल पड़े आगे की ओर 

कुछ राहगीर थके दिखे तो कुछ में था उत्साह भरा
 कुछ डोली पर बैठे दिखे और कुछ ने तो था मौन धरा 
सबकी मंज़िल एक थी वो सम्मेद शिखर की उँची टोंक 
वो पारसनाथ का उचा शिखर जो थी श्रृंख्ला की आखिरी टोंक 

बस चलते गए चलते गए ले पारस का नाम 
कठिन पड़ाव भी पार करा ले हाथो को थाम 
मंज़िल बहुत करीब दिखी जब पार किया जलमंदिर भी 
मन में अधिक ख़ुशी जगी मध्य राह पार करने की 

तपता सूरज सर पर था,कही छाँव  भी दिखी नहीं 
गर्मी का आलम बढ़ता रहा पर रुकना तो काम हुआ नहीं 

अनेकानेक मुनियो ने जहा घोर तपस्या साधी थी,
उस भूमि पर चढ़े चले जो स्वयं ही पुर्नियगामी थी 
कण कण में ईश्वर बसे यहाँ,यह जगह अद्धितीय निराली है,
पग पग में टोको पर चरण कमल और सबकी महिमा प्यारी है 

अपनीमंज़िल अब करीब दिखी अब कुछ पंग्ति का रास्ता था,
थके तन ने फिर जोश भरा,प्रभु का टोंक जो समीप था 
फिर क्या था। … 
चंचलमन भी शांत हुआ निर्मल हुआ आखो  का नीर ,
प्रभु के चरण को स्पर्श कर खुल गयी सबकी तक़दीर 
मौन खड़े देखते रहे प्रभु के चरणों को बार बार,
स्पर्श करते सोचते रहे कब देखेंगे ये अगली बार 

तृप्त हुआ जीवन दर्शन पाकर,जहा है प्रभु का मोक्षस्थान 
मात्र एक स्पर्श से ही दूर हुई सम्पूर्ण चढाई की थकान 
सूरज अब ढलने लगा,संध्या ने भी डाली ओढ़ 
तब सोचा फिर चल पड़े निचे अब ढलान की ऒर 

सच यह बात कहत सब भाई,
एकबार वन्दे जो कोई तक फिर पशुगति नहीं होइ 
सम्मेद शिखर का यह पड़ाव  सदेव ही स्मरणीय रहेगा,
जब भी यह कविता पड़ेंगे,आँखो में वो झिलमिल होगा …। 




How beautifully she composed this poem.
After shikhar ji we completed panch thrith yaatra n came back to indore.I will never forget this religious trip n fun with rishit mama n dhimant mama.
I will catch u soon in my next post.
byee!!

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